कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

खुलेआम बक्लोली

प्रिय देशवासियों
माफ करना मगर प्रिय शब्द सिर्फ इसलिए इस्तेमाल कर रहा हूँ क्यूंकि सब ऐसा करते हैं यही हमारी परंपरा है और परम्पराओं का पालन हम भारतीय बड़े जोश खरोश से करते हैं बल्कि परंपरा के लिए तो हम जान देने और लेने के लिए पिल पड़ते हैं! खैर नकारो के पास इसके अलावा और कोई काम होता भी नहीं! हम पारंपरिक रूप से नकारे और निट्ठल्ले हैं जब विश्व की प्रगति में हमारे योगदान की बात आती है तो हम बड़े शान से अपना शून्य आगे कर देते हैं! आह कितना मज़ेदार है की देश की प्रगति में हमारा योगदान शून्य है और हमें इसका गर्व भी है!
खैर जाने भी दो मगर मैं दिल से कहूँ तो तुम्हें प्रिय देशवासी कहते हुए मुझे तुम्हारी शकल टिंडे जैसी लग रही थी और मेरी जबान में करेले की कड़वाहट आगई थी तो
सो मेरे टिंडा जन
आज मैं कुछ कहना चाहता हूँ ये जानते हुए की तुम सुनना नहीं चाहोगे मत सुनो हो सकता है की तुम्हारी भावना आहत हो जाए! तुम मुझे जो कहना चाहो कहो मगर मेरी बाल सुलभ जिज्ञासा रही की हम अपनी परम्पराओं पर इतना गर्व क्यूँ करते हैं शर्म क्यूँ नहीं करते! हमने क्या किया है जिसपर गर्व किया जाए
शून्य पर क्या गर्व ??
शून्य का अर्थ क्या घंटा ??
फोटो का कोई मतलब नहीं कैमरा मेरे पास है 
सो फोटो खिंच के डाल दिया 

हमेशा बकलोल की तरह परंपरा परंपरा की बात करने वालों मुझे बताओ ज़रा की किस  परंपरा की बात करते हो असमानता की परंपरा की लुटेरो की प्रवृति की परंपरा की, शक्ति के सामने नतमस्तक रहने की परंपरा की कौन सी परंपरा
आजकल सुना है की तुम सहिष्णु समाज होने का दंभ भरते हो, सुनने में आता है की तुम्हें आजकल बलात्कार महिलाओं के प्रति हिंसा बहुत बुरी लगती है और कहते हो की ये तुम्हारी परंपरा नहीं! झूठ मत बोलो यारो झूठ मत बोलो ये विदेश से आयत की हुयी परंपरा नहीं है ये तुमने जनम दी है तुम्हारे पूर्वजो ने
मानलो तो शायद बदल पाओ
मगर मैं भी तुममे से एक हूँ जानता हूँ ना मानोगे ना
और ना ही तुम किसी असमानता के खिलाफ हो ना सहिष्णु हो,
तुम्हें दूसरों को दास बनाने की दमित इच्छाओं ने दास बनाया हुआ है!
तुम्हें मंदिरों मस्जिदों के आसपास होने पर आपत्ति है तुम इधर उधर भले कहो की ये तुम्हारे समाज की महान सहिष्णु परंपरा का प्रतीक है मगर दिल में मंदिर और मस्जिद को अलग करने की आग धकती रहती है!
तो जाओ झंडा लगा है लंबा चौड़ा

देशभक्ति जागो जन गन गाओ और सो जाओ 

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

"तुम्हें दूसरों को दास बनाने की दमित इच्छाओं ने दास बनाया हुआ है!"

yathaarth....