जीवन का बुत बनाना काम नहीं है शिल्पकार का
उसका काम है पत्थर को जीवन देना
मत हिचको, ओ, शब्दों के जादूगर !
जो जैसा है, वैसा कह दो
ताकि वह दिल को छू ले
आक्रोश भरे गीतों की धुन
वेदना के स्वर में सम्भव नहीं
ख़ून से रंगे हाथों की बातें
ज़ोर-ज़ोर से चीख़-चीख़ कर
छाती पीटकर कही जाती हैं
कह दो वह बात जिससे धड़के
सब का दिल
सुगंधों से भी जब ख़ून टपक रहा हो
छिपाया नहीं जा सकता
उसे शब्दों की ओट में ।
1 टिप्पणी:
अदभुत !
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