मन्दिरा
इंसान दो तरह के होते हैं! अच्छे लोग और बुरे लोग........मगर इतना भर कह देने से सब कुछ ठीक नहीं होजाता! दुनिया रंगीन है यहाँ कई रंग है और जिसको सिर्फ सफ़ेद और स्याह दिखे वो अँधा ही कहा जाएगा! इसलिए मंदिर सच कहूँ तो इस दुनिया में अच्छे लोग और बुरे लोग नहीं होते....बीच में रखी मेज़ तय कर देती है की अच्छा कौन है और बुरा कौन
हाँ मंदिर मै खान हूँ एक पठान एक मुसलमान और ये पहचान मुझे बहुत प्यारी है! कुबलय खान, चंगेज़ खान और लोदियों मुग़लों के बाद रविन्द्र बाबू के काबुलीवाले तक का सफ़र तकलीफदेह रहा है मगर स्वाभिमान से समझौता तो कभी नहीं किया! मगर अब तुम चाहती हो की मै अमेरिका के राष्ट्रपति से जाकर कहूँ की मैं खान तो हूँ मगर आतंकवादी नहीं
और तुम्हें क्या लगता है मन्दिरा की "मिस्टर प्रेसिडेंट के मान जाने पर तुम्हारा जिसे मैं अपना भी बेटा और दोस्त समझता था लौट आएगा! या लोग मुझसे प्यार करने लगेंगे नहीं मंदिरा मुझे ऐसा नहीं लगता
कल सड़क पर चलते हुए किसी ने मुझे टेररिस्ट कह दिया तब भी मुझे तुम्हारी याद आ गयी तुमने भी तो कहा था ...मगर फर्क रहा मंदिरा मैंने इस बार उसका मुंह तोड़ दिया ताकि उसे टेररिस्ट का सही मतलब पता चल जाए.......उसके ज़ख्म को देख कर लगा की तुमने मेरे अन्दर इससे भी कहीं गहरा ज़ख्म दिया है मंदिरा.............
तुम ने किसी भी मकसद से कहा हो मगर तुम्हारे उस वाक्य ने मुझे लगातार सोचने पर मजबूर किया है मंदिरा ये कोई पहली बार नहीं था की मुझे आतंकवादी कहा गया और पूरी दुनिया के मुस्लिम आतंकी संगठनों के नाम गिना दिए गए मगर तुर्की सिंगापूर मलेशिया जैसे उदाहरण कोई नहीं देगा मैं जानता हूँ! तुमने तो बहुत कुछ पढ़ा भी है भला मुसलमान क्या महज़ हिंदुस्तान पाकिस्तान और बंगलादेश भर में ही हैं!
नहीं मंदिरा मैं दुखी नहीं हूँ डरता भी नहीं हूँ
इस गंघोर अन्धोरों से डर गया तो कल की सुबह का नज़ारा कौन देखेगा!
सच कहूँ तो तुम्हारी बातों ने मुझे प्रेरित किया है मगर अमेरिका की राष्ट्रपति को " मैं खान हूँ मगर आतंकवादी नहीं हूँ" नहीं कहने जा रहा हूँ
मै किसी भीख पर जिंदा नहीं रहना चाहता मै हर किसी को अपनी देशभक्ति और अहिंसक होने का प्रमाण देता नहीं फिरूंगा! मैं नहीं कहूँगा की मुझे उससे नफरत है जिससे तुम करते हो
मगर तुमसे वादा है मंदिरा मैं उनसे मिलूँगा ज़रूर और कहूँगा "अपना तरीका बदलें वरना उनका नामो निशा मिट जाएगा "
मंदिरा अगर तुम्हें लगता है की मै आतंकवादी हूँ या मेरा नाम तुम्हारे बेटे की मौत की वजह है तो मैं तुम्हें बता दूँ की वो राठौर होने पर भी मारा ही जाता आस्ट्रेलिया में मारे गए लोग खान नहीं थे मंदिरा............
इंसान बिहारी होने भारतीय होने या खान, सिंह होने या काले या गोरे होने लड़की या लड़का होने किसी भी वजह से मारा जासकता है !
हम इंसानों ने इतने भेद इतने वर्ग बना दिए हैं की अब इस दुनिया पर शांति मुश्किल दिखती है, तुम जिससे प्यार करती थी वो तुम्हारी अपनी जाती धर्म का ही तो था उसी ने तुमको छोड़ दिया! तुम्हारे जैसा ही हूँ मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ मगर कहाँ "देखो ना हमारे बीच भी दीवार बन गयी" और जब वो तुम्हें छोड़ कर गया तो किसने सहारा दिया तुम्हें उन्हीं लोगों ने जिन्होंने तुम्हारे बच्चे को मार दिया! एक पल में दुश्मन दुसरे में दोस्त
हम इंसानों ने इतने भेद इतने वर्ग बना दिए हैं की अब इस दुनिया पर शांति मुश्किल दिखती है, तुम जिससे प्यार करती थी वो तुम्हारी अपनी जाती धर्म का ही तो था उसी ने तुमको छोड़ दिया! तुम्हारे जैसा ही हूँ मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ मगर कहाँ "देखो ना हमारे बीच भी दीवार बन गयी" और जब वो तुम्हें छोड़ कर गया तो किसने सहारा दिया तुम्हें उन्हीं लोगों ने जिन्होंने तुम्हारे बच्चे को मार दिया! एक पल में दुश्मन दुसरे में दोस्त
अजीब दुनिया है मंदिरा इस जटिलता को तुम जाने कैसे बर्दाश्त कर लेती हो मैं नहीं कर पाता!
लोग मुझे असहज कहते हैं मगर उनकी असहजता देखकर तो मुझे बड़ा ताज्जुब होता है मंदिरा
लोग मेरे व्यवहारिक ना होने पर हँसते हैं! मगर उनकी व्यवह्रिकता तो देखो कितनी द्वंदों से भारी है! हर बात को वर्गों में बाँट कर देखते हैं फिर उकता कर समूह बनाते हैं! लड़ते रहते हैं
मंदिरा शायद तुम्हें याद होगा या ना भी हो तुम्हें याद भी कहाँ रहता है कुछ अक्सर मेरे मैसेज या फोन का जवाब देना भूल ही जाती थी तुम, तुम्हें कहाँ याद रह पाता था की तुम्हारे इंतज़ार में मैं दूसरों से घंटों चैट कर लिया करता था! मगर कोशिश करो तो शायद याद आजाये "तुम्हे दर्जी में मैं दीखता था" मै वर्ग बांटना नहीं चाहता मगर सोचो कहाँ दर्जी और कहाँ आतंकवादी
मंदिरा मुसलमान का मतलब दर्जी नहीं होता! मुसलमान हमेशा दाढ़ी रखने वाले को ही नहीं कहते मुसलमान मेरी तरह क्लीन शेव भी हुआ करते हैं और सच तो ये है की ज़्यादातर मुसलमान क्लीनशेव ही हुआ करते हैं! और हर दाढ़ी वाला भी मुसलमान नहीं अब देखो ना पंजाब के सी एम् प्रकाश सिघ बादल भी तो लम्बी दाढ़ी रखते हैं! और कई साधू भी! जेठ की दोपहर में पैदा होने का ये मतलब नहीं की पूस की रात नहीं आएगी
तुम्हें समझाना भी बड़ा मुश्किल काम है और खासकर मेरे लिए जाने कब अकल आएगी तुम्हे!
मैंने भी अपना बेटा खोया है और इसका दुःख है और हमेशा रहेगा! और मैं अपने गुस्से को अपनी आग बनाऊंगा! मैंने तुम्हें अपनी पहचान से नहीं तोडा तो तुम क्यों तोडना चाहती हो
अगर तुम्हें लगता है की खान आतंकवादी होने का पर्याय है तो बेशक तुम मुझे आतकवादी मानो मुझे कोई आपत्ति नहीं
तुम्हारा
रिजवान

3 टिप्पणियां:
भाई ..मैं तो यही कहूंगा ...की हर आदमी आतंख्वादी है ...या तो वह सताया जाए ..या फिर ..उसकी ..स्वार्थ पूर्ति न हो तो वह ...आतंक वादी बन सकता है
रिज़्वान भाई में आपके उदबोधन से प्रभावित हुवा। किन्तु यह आप जैसे राष्ट्र्वादी देशप्रेमी नागरिक के बारे में सोची नहीं जा सकती। आप अब्दुल्ल हमीद, असफ़ाक उल्ला, ऐ पी जे कलाम सरीखें हैं। किन्तु आप में से ही कोई प्रतिनिधि आगे आये जो इस बात को सम्भाले, की भारत में सारे आतंकवादी मुस्ल्मान ही क्यूँ है। यह अलख तो आप में से ही जगानी पङेगी॥ यह यक्ष प्रश्न है भाईजान!!!
भीख के टुकड़ों पर गुंडा जिन्दा भी नहीं रहता.................
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