दस्तूर है सो लिख रहा हूँ! वरना लिखना बुरी बात है क्योकि जब आप लिख देते हैं तो वो प्रमाणिक मन जाता है! सबूत बन जाता है इसी लिए लोग नहीं लिखते या लिखते हैं तो मिटा देते हैं छुपा देते हैं
हमारी मज़बूरी भी है आखिर ऐसी आपाधापी में कोई भी क्यों लिखे और माना की लिख भी रहा हो तो लिखे क्या
और मैं भी क्या लिख रहा हूँ बकवास ही कर रहा हूँ ना! और ये भी जानता हूँ की मेरी बकवास दर्ज की जा रही हैं! अब सवाल की क्या बकवास भी सबूत बना करती है तो दोस्तों सच कहा जाए तो बकवास ही इतिहास बना करता है है जो बात आप मजाक में कहते हैं उसको जब सच मान लिया जाता है तो खून की नदिया बह जाती हैं! प्रोफ़ेसर ओक की बात कल तक मजाक था अब तर्क बन गया कल क़त्ल ए आम की वजह बनेगी! सोचो की अगर हनुमान अखाड़े वाले कहें की भाई बाबरी मस्जिद बनवा देते हैं मगर शर्त है की देश भर का मुसलमान इसी मस्जिद में नमाज़ पड़ेगा! या ये कहें की दुसरे पक्ष को मस्जिद के सामने आत्म हत्या करनी होगी! या ऐसा ही कुछ बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी कहे की मंदिर बनवा लो मगर दुसरे पक्ष के नेता आत्महत्या करें! (आप मुझे पागल समझ रहे हैं ना ?) मगर जो भी हो सोचो अगर सच में ऐसा हुआ तो ???????????????नहीं कैसे होगा पिछले २०० साल में इस मुद्दे ने हजारो जान ली है तो ऐसा आफर क्यों नहीं आसकता? वैसे नोट करलो ऐसा कोई आफर नहीं आएगा क्योकि दाहिने चलने वालों को दिमाग नहीं होता! समाज के अधिकतर नियम ऐसी बेवकूफियों से निकल कर आयें हैं! सड़क के किनारे चाय पीते हुए कही गयी बात समाज की संरचना तय करती है!
अब सोचो एक लड़की और एक लड़के की शादी करने से क्या होता है ???????
कंफिउज़ होने की ज़रूरत नहीं अब मैं बात कर रहा हूँ तो ज़ाहिर है गन्दी ही करूँगा
सोचो सोचो
| अब इसके पीछे कौन है ये जानना हमारा काम नहीं |
सिम्पल यार सेक्स और बच्चा हाँ यही इसी को थोडा इज्ज़त से बोलो परिवार बनेगा और इसकी शुरुआत चाहे जैसे करो अंजाम वही होगा! दो युवा अपने माँ बाप की मर्ज़ी और भगवान् के आशीर्वाद से जब मिलते हैं तो सेक्स करते हैं और जब खुद की मर्जी से मिलते हैं तो सेक्स करते हैं! बच्चे पैदा करते हैं उनको पालते हैं फिर उनको किसी से मिलते हैं और मर जाते हैं!
ओहो मै कुछ ज्यादा नहीं कहना चाहता बस पूछना चाहता हूँ " बस इसी चक्कर में ज़िन्दगी घुमती है और इसमें कुछ मसाले मिल जाते हैं जो ज़िन्दगी को खट्टी मीठी बनाते हैं इस मसाले को को जनून कहते हैं
यही जनून इंसान को पागल बना देता है कम्पलीटली बद-दिमाग.....कुछ संकी धरम करम करते हैं कुछ सब कुछ बर्बाद कर देते हैं कुछ लोग बनाने की कोशिश करते हैं! जो कुछ नहीं करते वो खेलते हैं अपने आस पास के लोगों से सम्मान हत्या करने वाले यही लोग है जो अपने बच्चों को मार डरते है ये वजह देकर की ये उनकी इज्ज़त ख़राब कर रहे थे या ख़राब हो रहे हैं उनकी शिकायत होती है की हमने पैदा किया हमने पाला तो तुम अपनी मर्ज़ी से कुछ मत करो
नहीं मैं इनलोगों के लिए कामांध होकर पैदा करने की बात नहीं करूँगा मगर एक राय ज़रूर दूंगा की अपने बच्चों को कंडोम का फ्लेवर और सेक्स के आसन भी बताया करें आखिर युवा इन बातों को कैसे जानेगा! उन्हें बताये की हमारी संस्कृति किन किन आसनों में सेक्स की इजाज़त देती है! हमें बताये की कंडोम का इस्तेमाल कैसे करें और किस फलेवर का हमारी संस्कृति या हमारा धरम किस फ्लेवर का इस्तेमाल करने की इजाज़त देता है!
आपको पता है ऐसी ही बकवास कई सवाल खड़ा कर देती है "सभी समाज पर इसलिए इसी बातों से बचिए
कोई लड़का लड़की पसंद आये तो उसका उपनाम पूछो जानो वो किस धरम जाति सामाजिक परिवेश आदि से है
2 टिप्पणियां:
जो आप कह रहे है वह मानव भी करता है और पशु भी, लेकीन मानव एक विशेष ओढ़ श्यामता के चलते परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण करता है जो सामाजिक मर्यादायो के पालन से ही संभव है अमर्यादित समाज विहीन व्यवस्था जंगल राज होगी
नहीं मैं इनलोगों के लिए कामांध होकर पैदा करने की बात नहीं करूँगा मगर एक राय ज़रूर दूंगा की अपने बच्चों को कंडोम का फ्लेवर और सेक्स के आसन भी बताया करें आखिर युवा इन बातों को कैसे जानेगा! उन्हें बताये की हमारी संस्कृति किन किन आसनों में सेक्स की इजाज़त देती है! हमें बताये की कंडोम का इस्तेमाल कैसे करें और किस फलेवर का हमारी संस्कृति या हमारा धरम किस फ्लेवर का इस्तेमाल करने की इजाज़त देता है! ..
जबरदस्त गुंडा दर्शन है जी.....पता नहीं कुछ रोज बाद तो मुझे लगता मुझे भी लोगों से जीने की इजाजत मांग ही लेनी चहिये वर्ना कब सूली पे चढ़ने की अकाक फैसला आजाये.........
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