बृहस्पतिवार को खूंटी लोकसभा क्षेत्र के दर्जनों मतदान केंद्रों पर सुरक्षाबलों की तैनाती नहीं थी। प्रशासन को जैसे पता था कि वहा पुलिस भेजो तब भी ठीक और न भेजो तब भी। सात बजे सुबह से ही ये पहुंचने लगे थे। मतदान बंद हुआ और सबने घर की राह ली। शहरी क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्रों का मत प्रतिशत अधिक रहा तो इसका कारण यही है कि इन ग्रामीणों की आस्था लोकतंत्र में है और ये वोट देने के प्रति किसी भी शिक्षित व्यक्ति से अधिक जागरूक हैं। मतदान को लेकर सभी जागरूकता कार्यक्रम शहरी क्षेत्र में ही चले। प्रशासन ने भी प्रखंड मुख्यालयों में ही होर्डिग लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। लेकिन, इससे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा।
बृहस्पतिवार को कर्रा जाने के क्रम में मिला गारू गांव। इस गाव का मतदान केंद्र चौकीदार के भरोसे। बिरहू, टुटोली, सावड़ा, कुदा, सागोर आदि कई बूथ, लेकिन दृश्य वहीं। सुरक्षाकर्मी कहीं नहीं। कर्रा से तोरपा जाने के रास्ते में पड़नेवाले बूथों पर भी यही नजारा देखने को मिला। यह पूछने पर कि क्या उन्हें डर नहीं कि कोई बोगस वोट डालेगा, या बूथ पर कब्जा कर लेगा। गारू के भुवन ने कहा नहीं, यहा ऐसा नहीं होता। एक युवक से पूछने पर कि क्या आपने वोट डाल दिया, नहीं हम मेहमानी में आए हैं, वोट नहीं देंगे, उसने कहा। एक वोट दे देंगे तो क्या हो जाएगा, उसने उल्टे सवाल किया, हम क्यूं दें वोट जब हमारा यहा नाम ही नहीं। अपने इसी चरित्र और मानसिकता से ये लोग पढ़े-लिखों से बेहतर हैं। सचमुच इनसे शिक्षा लेने की आवश्यकता है।
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