कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

औरतों की मंडी


भोपाल. महिलाओं की खरीद-फरोख्त में राजधानी भी पीछे नहीं है। प्रदेशभर के पचास जिलों में इस गैरकानूनी खरीद-फरोख्त में भोपाल पांचवें पायदान पर है। 

पुलिस मुख्यालय को प्रदेशभर के थानों से मिली रिपोर्ट के बाद इस बात का खुलासा हुआ है। 

रिपोर्ट में मिले आंकड़ों के मुताबिक मंदसौर जिले से सबसे ज्यादा मानव तस्करी की जाती है।

दरअसल जल्द ही प्रदेश में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल (मानव र्दुव्‍यापार निरोधक दस्ता) बनाया जा रहा हैं। इसके लिए आठ जिलों का चयन भी कर लिया गया है। यहां से अब तक सामने आए इस तरह के मामलों की रिपोर्ट भी पीएचक्यू को भेज दी गई है। इनमें भोपाल,होशंगाबाद,इंदौर,जबलपुर,रीवा,ग्वालियर,सागर और मंदसौर आदि जिले शामिल हैं।

हर जिले को मिलेंगे 7.58 लाख

प्रदेशभर के आठ जिलों में बनाए जा रहे एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के लिए गृह विभाग ने कुल ६क् लाख ६४ हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। जिसमें हर जिले को 7 लाख 58 हजार रुपए दिया जाना प्रस्तावित है। 

इसके लिए बाकायदा अलग स्टाफ भी लगाया जाएगा। जिसमें अजाक थाना,महिला थाना,महिला हेल्पलाइन के अधिकारी और थाने का अन्य स्टाफ मिलजुलकर काम करेंगे। इसके लिए हर थानों से एक-एक सबइंस्पेक्टर और महिला कॉन्स्टेबल को आवश्यक रूप से ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सके।

राजधानी का सच

थाना घटना स्थल/दिनांक अपहृता आरोपीअशोका गार्डन शिवनगर हिनौतिया/ 15-11-08 11 वर्षीय किशोरी 2 महिलाओं समेत 7 लोगस्टेशन बजरिया विजय नगर/ 2-12-08 07 वर्षीय किशोरी दो महिलाएंस्टेशन बजरिया सेमरा गेट/ 21-07-08 06 वर्षीय किशोरी एक महिला समेत 4 लोगहनुमानगंज कैंची छोला/ 13-08-08 10 वर्षीय किशोरी 3 महिलाओं समेत 8 लोगगुनगा ग्राम चांचेड़/ 18-09-08 — दो लोग(एसपी ऑफिस से मिली जानकारी के मुताबिक)

कितनी महिलाएं, लड़कियां हुईं गुम

थाना महिलाए लड़कियां कितनी लौटींनिशातपुरा 40 17 21कमला नगर 34 13 22कोलार 21 07 11ऐशबाग 20 06 13(आंकड़े इस वर्ष जुलाई तक)

कैसे होती है मानव तस्करी?

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में ऐसा गिरोह सक्रिय है जो देश ही नहीं देश से बाहर भी महिलाओं और किशोरियों की खरीद-फरोख्त कर रहा है। पहले एक खास क्षेत्र में रह रही महिलाओं-किशोरियों पर नजर रखना और फिर उन्हे अगवा कर लेना। इसके बाद उन्हे अलग-अलग रास्तों से होते हुए तयशुदा मंजिल तक ग्राहक के पास पहुंचा देना। इन्हे या तो वैश्यावृत्ति के दलदल में ढकेल दिया जाता है या फिर बंधुआ मजदूरी के लिए दूसरे गिरोहों को बेच दिया जाता है।

क्यों पड़ी जरूरत?

प्रदेश में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त की शिकायतें आने के बाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल गठित किए जाने पर विचार किया गया। गृह विभाग की सहमति के बाद इसे मूर्त रूप देना शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का तर्क है कि जब मानव तस्करी के खिलाफ प्राइवेट एनजीओ काम कर सकते हैं, तो एक प्रशासनिक अथॉरिटी (पुलिस) क्यों नहीं?

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ऐसे करेगी काम

इस सेल में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी,महिलाओं और किशोरियों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी तमाम जानकारियां इकट्ठा करेंगे। वे इस बात की भी जानकारी रखेंगे कि उनके जिले में अब तक ऐसे कितने मामले प्रकाश में आए हैं? कौन-कौन से गिरोह इस गैरकानूनी धंधे में शामिल हैं और किस तरीके से वे इसे अंजाम देते हैं? 

ताकि भविष्य में ऐसे मामले सामने आने के बाद इन गिरोहों से पूछताछ और आगे की विवेचना की जा सके। 

संगठित गिरोह की जानकारी नहीं

महिलाओं-लड़कियों के गुम होने की शिकायतें लगातर मिलती रहती हैं, लेकिन इसके पीछे कोई संगठित गिरोह खरीद-फरोख्त करता हो, ऐसी जानकारी मेरे कार्यकाल में प्रकाश में नहीं आई है।

आदर्श कटियार,एसएसपी,भोपाल

मानव र्दुव्‍यापार के लिए केंद्र सरकार की पहल पर एक अलग सेल का गठन किया जा रहा है। फिलहाल इसके लिए भोपाल समेत आठ जिलों को चुना गया है,जिनका काम त्वरित कार्रवाई करना होगा। इसमें एक सेल का गठन कर थानों में पदस्थ कर्मचारियों-अधिकारियों की डच्यूटी लगाई जाएगी,जो केवल यही काम करेंगे।

अरुण मिश्रा,एसपी,एजेके

महिलाओं की खरीद फरोख्त में प्रदेश काफी ऊपर है। सरकार ने इस गंभीरता को स्वीकारा है। आशा है कि इसी गंभीरता के साथ आगे कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस प्रकार के अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके।

एससी त्रिपाठी,सेवानिवृत्त डीजीपी

1 टिप्पणी:

anjule shyam ने कहा…

महिलाओं की खरीद फरोख्त में प्रदेश काफी ऊपर है। सरकार ने इस गंभीरता को स्वीकारा है। आशा है कि इसी गंभीरता के साथ आगे कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस प्रकार के अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके-
पाता नहीं ये सरकारी आशाएं कभी जमीन पर उतरती भी है या नहीं...