बहिष्कार के बाद जोगिंद्र ने कैथल के गांव करोड़ा में अपनी बहन के घर शरण ले रखी है, जबकि कृष्ण पत्नी के साथ चंडीगढ़ में पुलिस सुरक्षा में रह रहा है।
पंचायत के इस फैसले के बाद जोगिंद्र का घर खाली पड़ा है और फसल अभी तक खेतों में खड़ी है। वह अपनी सुरक्षा को लेकर जिले के आला अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। उसका आरोप है कि गांव वाले गेहूं नहीं काटने दे रहे हैं और उसकी फसल को भी जला दिया गया है।
क्या है मामला :
जोगिंद्र सिंह का साला कृष्ण अपनी बहन के घर झिंझरपुर आता रहता था। इसी दौरान गांव की एक लड़की से उसे प्रेम हो गया। जोगिंद्र को इसकी जानकारी थी। एक अप्रैल को यह प्रेमी जोड़ा गांव से फरार हो गया और अगले दिन चंडीगढ़ के एक मंदिर में शादी रचा ली। उन्होंने हाईकोर्ट में अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा भी हासिल कर ली।
गांव के मौजिज लोगों ने तीन अप्रैल तक लगातार पंचायतें कीं मगर इसमें जोगिंद्र सिंह शामिल नहीं हुआ। इसपर चार अप्रैल को गांव में छत्तीस बिरादरी की पंचायत हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे कोई संबंध नहीं रखेगा और न ही उसके खेत में फसल काटने जाएगा और न ही उसकी मदद करेगा। गांव के सरपंच हरि सिंह का कहना है कि जोगिंद्र को गांव वालों के साथ होना चाहिए था। उसने अपने साले का साथ देकर गलत किया।
अब छत्तीस बिरादरी की पंचायत ने यह फैसला किया है। वहीं हरि सिंह के पुत्र कृष्ण ने कहा कि गांव में रहने वाली हर बिरादरी के दो लोगों को लेकर पंचायत हुई थी। उसी में यह फैसला लिया गया।
अभी मामला मेरी नोटिस में नहीं आया है। गांव के माहौल को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। जोगिंद्र के परिवार को सुरक्षा दी जाएगी।
-पंकज अग्रवाल, डीसी कुरुक्षेत्र
हाईकोर्ट के आदेश पर जिला पुलिस ने जोड़े को सुरक्षा मुहैया कराई है। बहिष्कार मामले में पुलिस दोनों पक्षों की बात सुनकर उसे सुलझाएगी। फसल कटाई के लिए जोगिंद्र को सुरक्षा दी जा रही है।
-केवी रमणा, एसपी कुरुक्षेत्र
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