कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

उत्तरप्रदेश के मदरसे में रामायण का पाठ

उत्तरप्रदेश से एक ऐसी ख़बर आई है की मदरसों को तमाम तरह से बदनाम करने वाले तत्वों के मुह पर जूता पड़ेगा..... इस मदरसे में न सिर्फ रोजाना वंदे मातरम्‌ के गायन के बाद पवित्र कुरान पढ़ाई जाती है, बल्कि गीता और रामायण का भी पाठ होता है।

आंबेडकरनगर जिले के सतासीपुर स्थित नियामत-उलूम मदरसे में यह सिलसिला पिछले 30 सालों से चल रहा है। यहाँ के शिक्षक और बच्चे हाल ही वंदेमातरम्‌ के खिलाफ जारी फतवे का विरोध करते हुए एक सुर में कहते हैं कि वे हर वह कोशिश करेंगे जिससे कौमी एकता को बढ़ावा मिले।

मदरसे के संस्थापक और हेडमास्टर मौलवी मेहराब हासिम ने कहा, राष्ट्रहित से ऊँचा कोई नहीं है और वंदे मातरम्‌ तो हमारे देश का गुणगान है। ऐसे में यह समझ में नहीं आ रहा है कि वंदे मातरम्‌ गाने पर कुछ धर्म के ठेकेदारों ने क्यों ऐतराज जताया है। ये शर्मनाक, गंभीर और सोचनीय है।

इस मदरसे में 200 छात्र हैं और अहम बात यह कि इनमें से 30 हिंदू हैं। लंच समाप्त होने के बाद पढ़ाई शुरू होने के पहले इस मदरसे में एक और खास नजारा देखने को मिलता है, जब सभी छात्र कतार में खड़े होकर गायत्री मंत्र का पाठ करते हैं। बच्चों को गायत्री मंत्र के उच्चारण कराने वाला छठी कक्षा का छात्र रईस अहमद का कहना है, यहाँ पढ़ने पर गर्व महसूस होता है। हम एक साथ पढ़ते, खेलते और मिल-बांटकर खाते हैं। धर्म हमें नहीं बाँध सकता। मास्टर जी कहते हैं कि हम एक ही खुदा के बनाए हुए हैं।

मौलवी मेहराब हासिम ने सन्‌ 1976 में इस मदरसे की स्थापना की थी। इस मदरसे को कोई सरकारी सहायता भी नहीं मिलती है। यहां के लोग ही चंदा इकट्ठा करके मदरसे को दान करते हैं। संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक अब्दुल कलाम कहते हैं कि इस मदरसे से उन लोगों को सीख लेनी चाहिए जिनका काम एक-दूसरे को लड़वाना है। यहाँ शिक्षकों का एक ही मकसद है-गीता, कुरान और रामायण की तालीम देकर छात्रों को बेहतर इंसान बनाना।
सब तो ठीक है मगर मै वंदे मातरम के खिलाफ हूँ अगर वंदे मातरम गाना ही देशभक्ति का प्रमाण है तो भाई मै देशभक्त नही ......(भारत माता के पुत्रों युम्हारे घोटाले और स्वार्थ देशभक्ति नही अगर तुम देश को भारत माँ कहते हो तो तुम उसका बलात्कार कर रहे हो और कोई मत्र्सम्भोगी पुत्र देशभक्त नही हो सकता..........इस परिभाषा के तहत आचरण में तुम देशभक्त नही हो) जिसको जो करना है कर ले देश से निकालना है तो मुझे कोई चिंता नही मैं प्रमाण दे दे कर देशभक्ति नही करसकता................मै इंसानों से प्यार करता हूँ मुझे उनमे हिंदू मुसलमान सिख इसाई नज़र नही आता वो इंसान दीखता है ..........और वही इंसान देश बनते हैं .....। मै बच्चों को देख कर अपनी सिगरेट छिपा लेता हूँ क्योकि मुझे लगता है की मेरा देश नशेडी ना बन जाए मै औरतों की तस्करी के खिलाफ काम करता हूँ क्योकि लगता है की मेरा देश उसके गर्भ से जनम लेगा..............मगर तुम..............क्या करते हो और क्या सोचते हो..............कभी दिल पर हाथ रखना...................अगर दिल हो तो......................
मदरसा चाहे जितना बेहतर सोच रहा हो मगर वन्देमातरम का गाया जाना उसकी इमानदार कोशिश के बजाये सनकी पागलों का तुस्टीकरण है...........मगर गीता वैद और तमाम तरह के धरम गरंथो को पदाना एक बेहतरीन बात है............मदरसों को चाहिए वो संस्कृत को भी पुनर्जीवित करें............

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