कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

कई कारण होते हैं समलैंगिकता के

पुरुष समलिंगी को अंग्रेजी में गे (Gay) कहते हैं और महिला समलिंगी को लैस्बियन (Lesbian) कहा जाता है। समलैंगिकता का अस्तित्व प्राचीनकाल से ही सभी देशों में पाया गया है। लेकिन यह कभी उस रूप में नजर नहीं आया जैसा कि आधुनिक युग में देखने में आता है। आधुनिक युग में कुछ देशों ने समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दे दी है तो कुछ देश इसके सख्त खिलाफ हैं।

समलैंगिकता एक रोग है। यह प्रकृति के खिलाफ है। दुनियाभर में समलैंगिकता का ग्रॉफ बढ़ता जा रहा है। जहाँ हॉलीवुड-बॉलीवुड की फिल्में इन्हें बढ़ावा दे रही है वहीं सरकारें भी इन्हें कानूनी मान्यता देने में लगी है। समलैंकिगता का मूल कारण खोजना आवश्यक है अन्यथा एक सभ्य समाज के समक्ष स्वस्थ रूप से जीने का संकट पैदा होने लगेगा।

समलैंगिकता के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं, फिर भी वैज्ञानिक जगत की मान्यता है कि आनुवंशिकी और जन्म से पूर्व गर्भ में हार्मोन की गड़बड़ी और वातावरण के प्रभाव इसके कारण माने जाते रहे हैं। कुछ ‍चिकित्सक इसे मानसिक रोग मानते हैं तो बहुत से नहीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि समलैंगिकता केवल मनुष्यों में ही नहीं बल्कि कई पशुओं में भी पाई जाती है। पेंग्विन, चिंपाजी और डॉल्फिनों में यह रोग पाया गया है। लेकिन यह सभी प्राकृतिक गड़बड़ी या मानसिक विकारों का शिकार होते हैं।

समलैंगिकता के संबंध में एक दूसरी मान्यता के चलते सीधा-सा तर्क यह दिया जाता है कि यदि स्त्री या पुरुषों को सही दिशा में प्रेम नहीं मिलता है तो वे प्रेम के गलत रास्ते खोज लेते हैं। फिर जब गलत रास्तों पर चलने की आदत हो जाती है तो उन्हें सही रास्ते पसंद नहीं आते।

ओशो का कहना है कि पुरुष या स्त्रियों को एक-दूसरे से प्रेम नहीं मिलता है तो वे संभोग को ही प्रेम समझ लेते हैं। यह भी एक मनोवैज्ञानिक सत्य है कि जो पत्नियाँ अपने पति से प्रेम नहीं करतीं तो उनका पति संभोग के प्रति ज्यादा उत्सुक रहता है, खासकर दूसरी स्त्रियों से। ठीक इसके विपरित भी होता है।

दूसरी ओर ओशो यह भी कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति बाइ-सेक्सुअल है। देखना यह होगा कि किसमें किस तत्व की प्रथानता है। यदि किसी पुरुष में 60 प्रतिशत या इससे ज्यादा स्त्रैण मन है तो फिर उसके पुरुष होने का कोई महत्व नहीं। यही बात स्त्रियों पर भी लागू होती है। ओशो कहते हैं कि ऐसा कोई भी पुरुष खोजना संभव नहीं है, जो सौ प्रतिशत पुरुष हो और ऐसी कोई स्त्री खोजना संभव नहीं है, जो सौ प्रतिशत स्त्री हो।

बेवफाई का मनोविज्ञान : बेवफाई करने के कुछ कारण हैं। माँ बनने के बाद स्त्रियों का पूरा ध्यान बच्चे पर चला जाता है। ऐसे में पुरुष को लगता है कि उनकी पत्नी अब उससे प्रेम नहीं करती तब ऐसे में पुरुष दूसरी स्त्री से प्रेम की चाहत करने लगता है। हो सकता है कि वह कोई पुरुष ढूँढ ले।

वैज्ञानिकों अनुसार 28 से 37 वर्ष की उम्र के बीच स्त्रियों में सेक्स के प्रति गहरा आकर्षण जाग्रत होता है। ऐसे में यदि पति उसकी कामेच्छा की पूर्ति नहीं कर पाता है तो स्त्रियाँ दूसरा साथी ढूँढ लेती हैं। लोकलाज के कारण यदि वे पुरुष साथी नहीं ढूँढ पाती हैं तो हो सकता है कि वे कोई स्त्री ढूँढ लें!

कुछ और कारण: सामान्य तौर पर मनो-चिकित्सक पुरुष और स्त्री समलैंगिकता के कुछ और भी कारण बताते हैं:-

समलैंगिक पुरुष :
1. ऐसे पुरुष जो बचपन से ही महिलाओं के साथ ही रहे हैं और जिन्हें माँ ने ही पाल-पोसकर बड़ा किया है। इससे धीरे-धीरे उनकी मानसिक संरचना बदलकर ज्यादातर स्त्रेण हो जाती है।
2. वैज्ञानिक कहते हैं कि समलैंगिकता का कारण पुरुषों के सेक्स हार्मोन में परिवर्तन का होना है।
3. पत्नी द्वारा पति की उपेक्षा की जाना।
4. बचपन की गलतियाँ आदतों में बदल जाती हैं।
5. दो दोस्तों का इस कदर जुड़ जाना कि अलग होने का मन न करे।

समलैंगिक स्त्री :
1. बचपन से ही उसकी शिक्षा-दीक्षा पुरुषों की तरह दी जाती है जैसे कि उसे बेटी की जगह बेटा कहकर पुकारना। लड़कियों की अपेक्षा लड़के के साथ रहना आदि से स्त्रेण चित्त बदलकर पुरुषों-सा चित्त होने लगता है।
2. सेक्स हार्मोन में परिवर्तन का होना भी एक कारण है।
3. पति द्वारा इच्छाओं की पूर्ति न कर पाना।
4. बचपन की गलतियाँ आदतों में बदल जाती हैं।
5. दो दोस्तों का इस कदर जुड़ जाना कि अलग होने का मन न करे।

एक सभ्य समाज के समक्ष समलैंगिकों के समाज विकसित होना कितना उचित या अनुचित है इस पर विचार किया जाना चाहिए।
मुद्दा यह भी है कि समलैंगिकता प्राकृतिक है या अप्राकृतिक? आप इस पर कितनी ही बहस करते रहें, मगर प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह समाज को स्वस्थ, सुंदर और प्रेमपूर्ण बनाए।

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