अभी तक किसी भी चुनाव में चुनाव चिन्हों के कितने ही रूप देखने को मिले हैं लेकिन इस बार हो रहे हरियाणा विधान सभा चुनाव में एक ऐसे चुनाव चिन्ह की मांग की जा रही है जिससे चुनाव आयोग भी असमंजस में पड़ गया है। करनाल में पेशे से लेखक आनंद प्रकाश शर्मा ने जब चुनाव लड़ने की बात कही तो यह बिलकुल आम बात थी लेकिन जब उन्होंने अपना चुनाव चिन्ह कंडोम मांगा तो चुनाव आयोग सकते में आ गया।
आनंद एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं, जो बरसों से सेक्स वर्कर्स और एड्स जागरूकता पर काम किया है। 13 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है। उनके कंडोम चुनाव चिन्ह पर उनके भी उनकी मांग को जायज ठहरा रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग उन्हें कोई दूसरा चुनाव चिन्ह लेने के लिए मना रहा है।
चुनाव आयोग के मनाने पर भी शर्मा अपनी बात पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि वे इस संबंध में पिछले दो महीने से चुनाव आयोग के संपंर्क में हैं। उन्होंने कहा कि शुरू में चुनाव आयोग ने कंडोम चुनाव चिन्ह को भी चुनाव चिन्ह की लिस्ट में रखे जाने की सम्भावना जताई थी लेकिन जब लिस्ट सामने आई तो उसमें कंडोम का कहीं नामोनिशान नहीं था।
शर्मा का दावा है कि वह सेक्स वर्कर्स के हक की लड़ाई काफी समय से लड़ रहे हैं। वे देह व्यापार असुररक्षित यौन सम्बन्ध, एड्स और हिंदी को आधिकारिक भाषा के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। वे कहते है कि सरकार एड्स के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है तो फिर कंडोम को चुनाव चिन्ह में परहेज क्यू
मुझे लगता है उन्हें उनकी पसाद का चुनाव चिन्ह दिया जाना चाहिए, आज जहाँ चुनाव में तमाम हथकंडों का उपयोग होता है तो फिर सामाजिक मुद्दे का क्यो नही "आनद प्रकाश तुम आगे बडो हम तुम्हारे साथ हैं" मैंने एम्पोवेर पीपुल और "पीपुल्स पार्टिसिपेशन watch" की हरयाणा इकाई से निवेदन किया है की वो आनंद के पक्ष में हरसंभव काम करें
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