संस्कृत लुप्त प्राय भाषा है, मुझे काफी खोज बिन के बाद भी इस भाषा में छपने वाली किसी पत्रिका का नाम नही मिल पाया ज़ाहिर है संस्कृत में पत्रिकाएँ नही छपती या छपती भी हों तो अभी तक मुझे नही मिल पाई, भाषागत प्रतिस्पर्धा में जहाँ अंग्रेज़ी ने बाज़ी मार ली वही अन्य भाषायें पिछड़ रही हैं, फारसी बची है तो उसमे हमारा कोई योगदान नही ये इरान और उन मुल्कों की वजह से वहां को मात्र भाषाएँ फारसी हैं, रही बात उर्दू की तो जल्दी हो उर्दू पड़ने वालों का टोटा हो जाएगा, शुध्ध उर्दू बोलने वाले आज भी कहाँ मिलते है, वो हिन्दुस्तानी है जो हिन्दी उर्दू को पकड़ रखा है खैर अगर लुप्त प्राय भाषाओ को सिखाने का तरीका दिलचस्प हो, तो लोग फैशन में सिखने आयेंगे इस बात पर गौर फरमाते हुए गुजरात के संस्कृत क्लब ने अब लोकप्रिय फिल्मों के मशहूर डायलॉग के माध्यम से लोगों को संस्कृत सिखाने की दिलचस्प शुरुआत की है।
संस्कृत क्लब के सूत्रों के मुताबिक आमतौर पर यह देखा गया है कि लोगों को पाठ याद करने में भले ही कठिनाई हो, पर फिल्मी डायलॉग आसानी से याद हो जाते है। अहमदाबाद के परिमल गार्डन में हर माह की अंतिम शनिवार को संस्कृत क्लब के सदस्य फिल्मी डायलॉग के माध्यम से संस्कृत सीखते है। संस्कृत सिखाने के लिए जिन फिल्मों के डायलॉग का चयन किया गया है, उनमें शोले, गुरू, दामिनी, लगे रहो मुन्नाभाई, दीवार, हेराफेरी, द लीजेंड ऑफ भगत सिंह और क्रांतिवीर जैसी 11 लोकप्रिय फिल्में शामिल है। इन फिल्मों के डायलॉग को संस्कृत में लिखा गया है, ताकि लोगों में संस्कृत सीखने की रुचि जगाई जा सके। उदाहरणस्वरूप शोले फिल्म में गब्बर सिंह द्वारा कहा गया डायलॉग तेरा क्या होगा कालिया कुछ इस अंदाज में कहा जाता है, कालिया तव किं भविष्यसि। संस्कृत में इसका जवाब कुछ इस तरह होता है कि महोदय, मया भवत: लवणं खादितवान, जिसका अर्थ है सरकार मैंने आपका नमक खाया है। आगे का डायलॉग है, तो अब गोली खा जो संस्कृत में इस प्रकार कहा जाएगा कि ईदानिं गोलिकां अपि खादत। जब गब्बर कहता है कि पचास-पचास कोस दूर जब कोई बच्चा रोता है, तो उसकी मां कहती है..बेटा सो जा नहीं, तो गब्बर आ जाएगा, इस डायलॉग को संस्कृत में कहा जाएगा कि पंचाशत पंचाशत योजनम् दूरम यदा कोअपि बालक: रुदति, तदा तस्य माता वदति वत्स शयनंम् कुरू अन्यथा गब्बर अगमिष्यिति। संस्कृत क्लब के इस प्रयास को बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी लोग पसंद कर रहे है।तो हम भी आशा करें की मुझे जल्दी ही संस्कृत की किसी पत्रिका के विषय में पता चलेगा
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