आमतौर पर टालमटोल और लेटलतीफी की आदत को भारतीयों के साथ जोड़ा जाता है। भारतीयों को इस बात के लिए बुरा भला कहा जाता है कि वे कहीं भी समय से नहीं पहुंच सकते और कोई भी काम समय से नहीं करते। फिर बात चाहे, कार्यालय समय पर पहुंचने की हो या किसी की बारात में। लेकिन यह जानकर किसी को भी हैरानी हो सकती है कि अमेरिकी और यूरोपीय देशों में 'बी लेट फार समथिंग डे' मनाया जाता है।
ऐसे ही एक क्लब की शिनेया लेस्का ने अपने ब्लाग में लिखा है कि काम को टालते रहने से कई बार ढेरों काम न केवल जमा हो जाते हैं, बल्कि कई बार यह आदत जानलेवा साबित होती है। खासतौर से किसी बीमारी के होने पर डाक्टर के पास जाने के कार्यक्रम को टालते रहना, कुछ ऐसा ही है, जिस पर मेरा अनुभव बेहद खराब रहा।
यहां तक की इंटरनेट पर 'टालमटोल' बंधुओं का एक भरा पूरा परिवार है जो टालते रहने को अपनी शान मानते हैं और जिनके पास हर काम को टालने के लिए एक नया बहाना हमेशा तैयार रहता है। इसी प्रकार की आदत से परेशान सुलेखा लुंबा इस मामले में जरा अलग सोच रखती हैं। वह कहती हैं कि हम किसी काम को टालते नहीं हैं, बल्कि हर काम का एक निश्चित समय ऊपर वाले ने तय कर रखा है और वह उसी समय पर होता है।
गृह मंत्रालय में कार्यरत एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सरकारी कार्यालयों में देर से आने और काम को टालते रहने को सरकारी कर्मचारी अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं और किसी भी सरकारी दफ्तर में चले जाइए, हर कर्मचारी, अधिकारी सरकारी फाइलों को एक दूसरे पर टालते दिख जाएंगे और इसी को सरकारी भाषा में लालफीताशाही कहा जाता है। लेकिन विदेशों में लोग टालमटोल की आदत पर परेशान नहीं होते, वे इसका जश्न मनाते हैं।
इस दिन की शुरूआत अमेरिका में 'प्रोक्रेस्टिनेटर्स क्लब आफ अमेरिका' ने की थी। इस क्लब के लोगों का नारा है, जिस काम को आप कल पर टाल सकते हैं, उसे आज कभी न करें।
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