कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

मै और मेरी विजय

मै उकाब से भी ऊँचा उडा हूँ
गिरा हूँ गर्त में मध्य में समंजित करें
समुद्र ताल की तलहटी से
भी मीलों निचे पाताल में,
रेंगा हूँ किसी गंदे नाले के कीडे की तरह
फिर परवानो सा जला हूँ
सुनहरी टयूबों के इर्द गिर्द नाचते हुए
नग-धड़ंग शिव की आराधना की है
तांडव नृत्य किया है
मर्यादा परुसुत्तम भी बना हूँ
राजतिलक भी लगाया
कौवों और लोमडियों की तरह
चतुराई भी दिखाई
और खरगोश की तरह कछुए से मुंह की भी खायी है
मगर परमाणु की तरह चक्कर काटता रहता हूँ
अब तक जड़ नही हुआ
कियोकी जानता हूँ विजय मेरी होगी
और अंततः मै छू लूँगा इश्वर का माथा
कोमल उँगलियों से
फिर चूम कर उसे कहूँगा
यही सत्य है शिव भी और सुंदर भी
मुझे पता है वो अलौकिक पल
मेरे विजय का होगा
निश्छल विजय का
जहाँ मै और मेरी विजय होगी और कोई नही ........

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