कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

अलौकिकता तार्किक सत्य से अधिक सत्य ..........

दफ्तर से घर आता हूँ
सिगरेट का काश लगाते
दरवाज़े बंद कर लेता हूँ
और कोई घंटे भर तुमसे बातें किया करता हूँ
तुम्हे भी पता है और मुझे भी
की तुम नही हो
अब हमें बिछडे वर्षो हो चुके
मगर सच कहूँ ?
तुम अब पहले से अधिक निकट हो मेरे
तुम शाएद इसे "केमिकल लोचा" कहो
कभी कभी तो मुझे भी अहसास होता है
मगर क्या कहें आस्था तो बस आस्था है
वो कहती है की तुम हो तो बस हो
अब तुम्हारा सामीप्य तुम्हारे हाथों में नही
इस पर मेरा एकाधिकार है
भले ही ये सामीप्य ठोस नही अलौकिक है
मगर अलौकिकता किसी
वैज्ञानिक तार्किक सत्य से अधिक सत्य होती है

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