
ऐसा हो नव वर्ष
नए वर्ष का हुआ आगमन
उल्लासित हम करें स्वागतम
है मेरी ये मनोकामना
जग में हो अब शांति स्थापना
बढ़े परस्पर भाई चारा
ऐसा हो नव वर्ष हमारा
आज यहाँ हर व्यक्ति सुखी हो
रोटी कपड़ा सिर पर छत हो
जन-जन तक हर सुविधा पहुँचे
गाँव शहर का भेद न पनपे
हरी भरी धरती उपवन हो
जीवन की हर राह सरल हो
रहे न अब दुश्मन का खतरा
बहे न कोई खून का कतरा
कभी न कोई प्रिय जन बिछड़े
गोद और सिंदूर न उजड़े
जग में न हो नरसंहार
फूले फले प्यार ही प्यार
आतंकवाद की जड़ें उखाड़ें
बम बंदूकों को अब फेंकें
देश धर्म के लिए न झगड़ें
सांप्रदायिक दंगे न भड़कें
नफ़रत से अब नाता तोड़ें
दिल से दिल का रिश्ता जोड़ें
दुख के बादल अब छट जाएँ
सुख का उजियारा छा जाए
बहे प्रेम की अविरल धारा
जिसमें रम जाएँ जग सारा
अमन शांति हो मार्ग हमारा
मानवता हो धर्म हमारा
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