कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

वो दोस्त था अच्छे दिनों का

पिछले कुछ दिनों से कुछेक लोगों को मानाने की कोशिश करता रहा था मगर उनका जवाब वैसा ही था जैसा अक्सर आया करता है!
मगर
अब नही बस जितना करना था कर चुका! और मैंने जो किया सब सही था इन्सान को कोई मलाल बाकि नही रखना चाहिए मुझे भी नही

हम जी रहे हैं वहां, हैं मुहाफिज़ जहाँ कातिलों की तरह !
मेरी बातों पर हंसती है दुनिया अभी, मै सुना जाऊंगा फैसलों की तरह !!

Come on

किसी से मेरी मंजिल का पता पाया नही जाता!
जहाँ
मै हूँ वहां फरिश्तों से भी आया नही जाता!!

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