आज ऐतवार था १२ बजे नींद खुली तो कपड़े धोये नहाया और फिर पुनीत ने याद दिलाया सर्वेश्वर जी ने आज खाने पर बुलाया है कुछ इन्कोय्री थी जो खाने के नाम पर करनी थी उन्हें भी आराम रहता मुझे भी कोई आपत्ति नही थी
ऐतवार था सो कुरता पहना जींस डाली और निकल पड़ा आज कल मई कुरता सिर्फ़ ऐतवार को ही पहनता हूँ पहले तो ऐतवार को पैंट शैर्ट पहनता था मगर अब रूटीन पुरी तरह उलट गई है
खैर मै और पुनीत बिशप कोटेंन स्कूल पहुचे हमारा उद्देश स्कूल घूमना था पुनीत ने साथ कैमरा भी रखा था ! जब मै शिमला आया था तो राजीव उस कहा की वहां काटेंन यानि रुई बरसती थी इसी लिए उसे बी सी एस कहते है मगर वो वास्तव में एक ईसाई मिशनरी के नाम पर है जिन्होंने उसकी स्थापना की थी मगर सर्वेश्वर जी ने कहा पहले घर चलें ! मैंने मोबाईल में टाइम देखा सचमुच ३ बज चुके थे खाने का टाइम पार हो रहा था पुनीत ने घर से निकलते ही कहा था लंच लेकर चलें सो मैंने सर्वेश्वर की बात मानली !
सर्वेश्वर गडवाल से हैं यहाँ बिशप काटेंन स्कूल की कैंटीन में बैरा हैं उनकी पत्नी भी यहीं रहती हैं प्यारी लेडी है जब मै उनके घर पंहुचा तो दंग रह गया २ रूम सेट का वो फ्लैट १८०० का था मेरा १ रूम का फ्लैट ४००० का हद होती है भाई मना उनका घर थोड़ा अन्दर था मगर थोड़ा ही मैंने लगे हाथ ही अमरुद का जूस पीते हुए उनसे मेरे लिए भी घर देखने की गुजारिश कर दी उन्होंने वादा किया है वो ऐसा करेंगे
खैर थोडी देर बाद खाना लगाया गया! दाल चावल सलाद और मटर-मशरूम की सब्जी मज़ेदार थी मगर खाते हुए याद आया सांप का छाता
वो लम्बी वाली मशरूम को बचपन में हम सांप का छाता कहते थे गोल वाली मशरूम तब हमारे लिए सांप का अंडा हुआ करती थी , अब कुछ भी हो मगर मशरूम को मुसहर खाते है सो ये बुरी छीज है ऐसा हमारा मानना था ऐसा नही है की सिर्फ़ बच्चों का ये तो बड़े भी मानते थे और शाएद आज भी मानते हों शायद इस लिए क्योकि हमारे यहाँ मांसाहार ही एकलौता आहार माना जाता है शाकाहारiyon को आदमी ही कहाँ मानते हैं मगर कभी कभी ताज्जुब होता है की मेरे घर में शाकाहारियों की जो फौज है वो भला कहाँ से आई!
खैर जो भी सांप का ये छाता मज़ेदार होता है जिसने कभी टेस्ट नही किया उन्हें टेस्ट करना चाहिए
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें