कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

गली-गली तेरी याद बिछी है

गली-गली तेरी याद बिछी है, प्यार रस्ता देख के चलमुझसे इतनी वहशत है तो मेरी हदों से से दूर निकल।
एक समय तेरा फूल-सा नाज़ुक हाथ था मेरे शानों परएक ये वक़्त कि मैं तनहा और दुख के काँटों का जंगल।
याद है अब तक तुझसे बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझेतू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल।
मेरा मुँह क्या देख रहा है, देख उस काली रात तो देखमैं वही तेरा हमराही हूँ, साथ मेरे चलना है तो चल।

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