कुछ बातें जो संभ्रात इतिहास में दर्ज नहीं की जा सकेंगी

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैंतुझे ऐ ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं
तबीयत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों मेंहम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं
मेरी नज़रें भी ऐसे क़ातिलों का जान-ओ-ईमान हैनिगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं
‘फिराक़’ बदल कर भेष मिलता है कोई क़ाफ़िरकभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं

(नज़रें : eyes, glances; क़ातिल : murderer; जान-ओ-ईमान : life and belief) (क़ाफ़िर : non-believer)

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